बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़ी सभी लंबित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। सुनवाई पूरी होने के बाद, कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इस मामले में राज्य सरकार और विभिन्न शिक्षक संगठनों, दोनों की ओर से पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थीं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि शिक्षकों को पहले ही पांच साल की छूट दी जा चुकी है, और अब बाकी शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा में शामिल होना अनिवार्य होगा।
सुनवाई के दौरान जस्टिस ने साफ शब्दों में कहा कि शिक्षकों को अपनी योग्यता साबित करने के लिए पहले ही पांच साल की लंबी मोहलत दी जा चुकी थी। कोर्ट के अनुसार उन लोगों को और कोई रियायत देना उचित नहीं होगा, जो इस तय समय सीमा के बाद भी परीक्षा पास करने में नाकाम रहे। कोर्ट ने यह फैसला दिया कि पात्रता परीक्षा पास किए बिना शिक्षक के तौर पर काम करना नियमों के खिलाफ है।
बिना TET पास किए नहीं बन सकते टीचर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पात्रता परीक्षा से जुड़े नियमों में जो भी छूट दी जानी थी, वह पहले ही दी जा चुकी है, इसलिए, अब कोई भी व्यक्ति यह परीक्षा पास किए बिना शिक्षक नहीं बन सकता। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा से छूट की मांग की गई थी।
शिक्षक संगठनों की अपील
दूसरी ओर राज्य सरकार और शिक्षक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका दायर की है। सरकारी शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष, उपेंद्र कौशल ने सभी साथी शिक्षकों से धैर्य और संयम बनाए रखने की अपील की है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह फैसला आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को कोई विशेष राहत मिलेगी या फिर उन्हें अनिवार्य रूप से परीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा। तब तक शिक्षकों से धैर्य रखने का आग्रह किया गया है।
Picture Source :

